तकदीर का करम है जो हम तुम से मिले

हरन और सब का शवाय हो तुम,
ऐसा खिलता हुआ गुलाब हो तुम
तुम जैसा ही होगा ना और कोई.
हर हसीनों में लाजवाब हो तुम

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फिजाओं का मौसम जाने पर बहारों का मौसम आया,
गुलाब से गुलाब का रंग तेरे गालों पर आया ।
तेरे नैनो ने काली घटा का काजल होगा,
जवानी जो तुम पे चढ़ी नशा मेरी आंखों में आया ।


क्या चांद आज खद जमीं पे उतर आया है,
या तो खुदा की माया है या फिर मेरे सपनों का गया है।
ऐसा हसीन ना तो पहले कभी देखा था ना ही देखा है,
ऐसा लाजवाब कौन है जो मेरी आंखों के सामने आया है।


ना देखो मुझको निगाहें तिरछी करके,
कहीं होश खो दू अपना मै ।
तिरछी करके अब न झुकाओं इन निगाहों को,
जरा निगाह से निगाह मिला तो लू मैं

पहली नजर में बस गई तुम दिल में हमारे ,
बेचैनियां हो गई है इस कदर दिल में हमारे ।
ना समय।
कटत


है ना ही रातें कटती है,


अब हर वक्त ख्याल आता है तुम्हारा, दिल में हमारे 1



तेरी रेशमी बाल, आंखों में बदली छिपी है तर
तेरी हिरणी से चाल, होठों पे दिल की बात छिपी है तेरे 11

तेरी जुल्फों की इन घटाओं में होश न आए कभी
अगर सम्भलना चाह तो सम्भल न पाए कभी

अब आप बिन जी नहीं लगता इस जहां में,
बेचैनियों ने इस कदर जन्म ले लिया है दिल में ।
हर पल सिर्फ आप ही को याद करता है ये दिल,
अब हर लम्हा गुजारते हैं आपके इन्तजार में !

पहली नजरों में हम तेरे हो गये,
तेरी झील सी आँखों में खो गये ।
तेरे हुस्न का रंग चढ़ा कुछ ऐसे ,
सदा के लिए हम तेरे हो गये ।
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तेरी जुल्फें काली घटाएं सी लगती है,
चाल ते री हिरणी सी लगती है ।
हर अदाएं तेरी मुझको भाई है,
पर ये आंखे तेरी मुझे कातिल सी लगती है ।

भूल गया मैं ये दुनिया सारी, बन गई जो तू मेरी
भोली-भाली ये सूरत तेरी, उड़ा के ले गई निन्दिया मेरी

रोजाना उठकर आइने को देखता हूँ मैं,
कुछ दूर चलकर रूक जाता हु मैं
जब याद आती है आपकी तो
अपने आपको भी भूल जाता हूं मैं u

दिल की दुनिया में हार बनाने वाले,
कभी ना भूलना इस आशियाने से ।
बनते
है
हार
कई मुद्दतो में ,
कहीं टूट न जाए ये आशिकी तेरी इक नादानी से-

जवां तुम भी हो जवा हम भी है, फिर मिलने में ये दूरी कैसी ।
एक-दो पल का मिलन नहीं, ये जन्म-जन्म का मिलन है किर

सालो -साल युही बित जायेंगे ,
मगर दिल की बातें ही रह जायेगी।
जरा आंखें खोल कर देख तो लो ,
नहीं प्यार की ये सुद्धा घड़ी ललित वेगी ।

तकदीर का करम है जो हम तुम से मिले ।
कहीं तो ये दुनिया बेरंग और बढ़ जाते फासले ।


ख्वाब सजाया है आखो मे ,
तुम्हें बसाया है सांसों में ।
इस गुलशन में फूल थे कई,
अगर मैंने तुम्हें चुना हजारों में ।


Author: mk746

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