सागर मथ के सभी देवता अमृत पर ललचाए तुम अभ्यंकर विष को पीकर नीलकंठ कहलाए


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सारे जगत को देने वाले, मैं क्या तुझको भेंट चढाऊं,
जिसके नाम से आए ख़ुशबू, मैं क्या उसको फूल चढाऊं.
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ॐ में ही आस्था हैं, ॐ में ही विश्वास हैं,
ॐ में ही शक्ति हैं, ॐ में ही संसार,
ॐ से होती हैं अच्छे दिन की शुरूआत.
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राम नाम की लूट हैं, लुटे जा सो लूट
फिर पाछे पछतायेगा, जब प्राण जाएँगे छूट.
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सागर मथ के सभी देवता अमृत पर ललचाए
तुम अभ्यंकर विष को पीकर नीलकंठ कहलाए
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हर ओर सत्यम-शिवम-सुन्दरम,
हर हृदय में हर-हर हैं,
जड़ चेतन में अभिव्यक्त सतत
कंकर-कंकर में शंकर हैं.
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इतना सच्चा हो हमारा विश्वास,
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पांच पहर काम (कर्म) किया, तीन पहर सोए,
एको घड़ी न हरी भजे तो मुक्ति कहाँ से होए
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खुशबु ?आ रही है कहीँ से #गांजे और #भांग की !!! ?
शायद #खिड़की? खुली रह गयी है ‘ #मेरेमहांकाल’ के #दरबार की…!! हरहर_महादेव ‘…?


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ठंडऊनकोलगैगीजिनकेकरमोमेंदागहै”… हमतोभोलेनाथकेभक्त्तहैभैयाहमारेतोमूंहमेंभीआगहै…!!
हरहरमहादेव ..!!
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सबसे बड़ा तेरा दरबार है, तू ही सब का पालनहार है
सजा दे या माफी महादेव, तू ही हमारी सरकार है….
हर हर महादेव
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कैसे कह दूँ कि मेरी, हर दुआ बेअसर हो गई,
मैं जब जब भी रोया, मेरे भोलेनाथ को खबर हो गई…!!!
~जय श्री भोलेनाथ~
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