तुम ना आ सके तो मजबूरी बता दिया, और हम ना आ सके तो हमें किसी और कि बता दिया. ?

तुम ना आ सके तो मजबूरी बता दिया,
और हम ना आ सके तो हमें किसी और कि बता दिया.
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क्यू उस को मनाने के लिये मन्नते करू मैं,
मुझे उस से मौहब्बत है कोई मतलब तो नही.
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ना कर तू इतनी कोशिशे,
मेरे दर्द को समझने की,
पहले इश्क़ कर,
फिर ज़ख्म खा,
फिर लिख दवा मेरे दर्द की।
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जहा से तेरा मन चाहे वहा से मेरी ज़िन्दगी को पढ़ ले तू,
पन्ना चाहे कोई भी हो, हर पन्ने पे तेरा ही नाम होगा.
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एक अजीब सा मंजर नजर आता है,
हर एक आँसू संमनद नजर आता है,
कहां रखुं मैं शीशे सा दिल अपना,
हर किसी के हाथ में पत्थर नजर आता है.
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अब ना करूँगा अपने दर्द को बया किसी के सामने,
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यूँ करना…!!!
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मुझें बहुत प्यारी है तुम्हारी दी हुई हर निशानी
चाहें वों दिल का दर्द हो या आँखों का पानी..!!
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सब दुखो पे कुछ कुछ लिखा रह गया,
नाम ऐसा कुछ तू मिटा के गया.
याद मेरी सताएगी हर दिन तुझे
बिन खता के जो मुझ को रुला के गया
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चाँद निकलेगा तो दुआ मांगेंगे
अपने हिस्से में मुकदर का लिखा मांगेंगे
हम तलबगार नहीं दुनिया और दौलत के
हम रब से सिर्फ आपकी वफ़ा मांगेंगे!
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हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आए थे
किस बात की सजा दी तुने हमको बेवफा
हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आए थे।
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दो दिलों की धड़कनों में एक साज़ होता है
सबको अपनी-अपनी मोहब्बत पर नाज़ होता है
उसमें से हर एक बेवफा? नहीं होता
उसकी बेवफ़ाई के पीछे भी कोई राज होता है!
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हर धड़कन में एक राज़ होता है
बात को बताने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे बेवाफ़ाई की
हर किसी को अपने प्यार पर नाज़ होता है।
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